Thursday, July 30, 2009

दोस्ती का अहसास

अगस्त का पहला रविवार फ्रेंडशिप डे के रूप में सेलिब्रेट किया जाएगा। एक ऐसा दिन जब दोस्तों से मिलकर उन लम्हों को याद किया जाएगा, जो एक-दूसरे के साथ गुजारे गए हैं, साथ की हुई शरारत, मस्ती और वे सब कुछ जिससे अटूट रिश्ते ओर भी मजबूत हो जाए..युवाओं को इस खास दिन का बेसब्री से इंतजार होता है। फ्रेंडशिप डे पर किसी ने पिकनिक मनाने की तैयारी की है तो किसी ने होटल में लंच और डिनर की। गिफ्ट-कार्ड की खरीदी भी की होगी....
सुबह से शाम तक दोस्तों से मिलते वक्त हरेक की जुबां पर ‘हैप्पी फैंडशिप डे’ की विश होगी। आधुनिकता के इस दौर में अन्य रिश्तों की तरह दोस्ती का रिश्ता भी आधुनिक हो चला है।
दोस्ती के नाम कुर्बान खास दिन के लिए शहर के गिफ्ट सेंटर्स व कार्ड गैलरियों में युवाओं की भीड़ है......इस साल भी दोस्ती का ये सेलिब्रेशन कुछ ज्यादा होगा।
स्कूली बच्चों के ग्रुप से लेकर कॉलेज के युवाओं और जिंदगी के सफर में दूर तक आ चुके लोग भी दोस्ती के जज्बे का इजहार होगा... दोस्ती के पैगामों का साथ गुलाब का फूल देगा। शहर के गार्डन, होटलों के अलावा बाहर घूमने लायक जगहों पर दोस्तों का सेलिब्रेशन होगा। जीवन में दोस्तों का एक खास स्थान होता है, क्योंकि वे जीवन के किसी न किसी मोड़ पर खासे निर्णायक साबित होते हैं। ..इसलिए मनाया जाता है ‘फ्रेंडशिप डे’

Friday, July 24, 2009

सच है या जिंदगी से खिलवाड़

"सच का सामना" कार्यक्रम से हर तरफ़ में हाय तौबा मची हुई है... राज्य सभा को भी इससे आपत्ति है.........और मीडिया को भी ..... मीडिया के लोग इसी के खिलाफ लिख रहे हैं... आखिर इस कार्यक्रम में सच ही तो दिखाया जा रहा है फिर इस पर ऐतराज़ क्यों... लेकिन शो के सवाल बेहद पर्सनल हैं...हम सभी मानते हैं कि कुछ सच ऐसे होते हैं जो सामने न आएं तो अच्छा रहता है... लेकिन अगर सामनेवाला व्यक्ति सच को बोलना चाहता है... तो उसे सुनने में क्या बुरा है... और ये तो बड़ी हिम्मत की बात है। .... सच कड़वा होता है.. फिर हम और आप इस कड़वेपन को महसूस करने से क्यों डरते हैं... और कार्यक्रम के जिन सवालों पर सवाल उठाए जा रहे हैं... वो सवाल पहले से ही प्रतिभागी को पता होते हैं॥ उसे पता होता है कि पूरी दुनिया के सामने उससे कैसे सवाल किए जाएंगे... इसके बावजूद अगर वो व्यक्ति सच की कुर्सी पर बैठता है तो उसकी मर्जी.. लेकिन फिर भी ऐसे program जब सेक्स जैसे सवालों पर ही अपना निशाना बनते नज़र आए तो हम सोच सकते है की ऐसे progrm का future क्या होगा ?

Thursday, July 16, 2009

वो दिन........काश फिर लौटे....

वो कॉलेज क तीन साल तीन पल बनकर निकल गए। वो क्लास को बंक करना। कैंटीन में, तो कभी maggie point पर बठे रहना । friends के साथ गपसप तो exam टाइम में लब्रैरी में सर खपाना ।कॉलेज के उन दोस्तों से अब तक साथ साथ है को किसी की मंजिल ही बदल गई और साथ-साथ रास्ता भी बदल लिया शायद हम आगे चले गए या हमे पीछे छोड़ गए। कुछ भी यही तो जीवन है। पुराने दोस्तो को अलविदा नए दोस्तो को सलाम .........

Saturday, January 31, 2009

ब्लॉग


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