Friday, July 24, 2009
सच है या जिंदगी से खिलवाड़
"सच का सामना" कार्यक्रम से हर तरफ़ में हाय तौबा मची हुई है... राज्य सभा को भी इससे आपत्ति है.........और मीडिया को भी ..... मीडिया के लोग इसी के खिलाफ लिख रहे हैं... आखिर इस कार्यक्रम में सच ही तो दिखाया जा रहा है फिर इस पर ऐतराज़ क्यों... लेकिन शो के सवाल बेहद पर्सनल हैं...हम सभी मानते हैं कि कुछ सच ऐसे होते हैं जो सामने न आएं तो अच्छा रहता है... लेकिन अगर सामनेवाला व्यक्ति सच को बोलना चाहता है... तो उसे सुनने में क्या बुरा है... और ये तो बड़ी हिम्मत की बात है। .... सच कड़वा होता है.. फिर हम और आप इस कड़वेपन को महसूस करने से क्यों डरते हैं... और कार्यक्रम के जिन सवालों पर सवाल उठाए जा रहे हैं... वो सवाल पहले से ही प्रतिभागी को पता होते हैं॥ उसे पता होता है कि पूरी दुनिया के सामने उससे कैसे सवाल किए जाएंगे... इसके बावजूद अगर वो व्यक्ति सच की कुर्सी पर बैठता है तो उसकी मर्जी.. लेकिन फिर भी ऐसे program जब सेक्स जैसे सवालों पर ही अपना निशाना बनते नज़र आए तो हम सोच सकते है की ऐसे progrm का future क्या होगा ?
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बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
ReplyDeletesach bolane ki bhee apni ek garima hoti hai. narayan narayan
ReplyDeleteदोस्त, ये सब बाजार के खिलाड़ी हैं। अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए ये लोग कोई भी सवाल पूछ सकते हैं और गढ़ सकते हैं। आप तय करें कि आपको क्या देखना है। बाजार की भेड़चाल से बचें। बहरहाल, अच्छा लिखा है। मेरे ब्लॉग पर भी आएं।
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